हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख और क़ुम की नमाज़-ए-जुमा के ख़तीब आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने नमाज़-ए-जुमा के ख़ुत्बे में शहीद रहबर (र) की ऐतिहासिक अंतिम यात्रा को इस्लामी क्रांति का एक महान सभ्यतागत कारनामा बताते हुए उसके महत्वपूर्ण संदेशों और शिक्षाओं को बयान किया।
उन्होंने कहा कि इस अभूतपूर्व जनसमूह ने उम्मत, विलायत और इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे के बीच मजबूत संबंध को एक बार फिर दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया।
क़ुम के इमाम जुमा ने कहा कि शहीद रहबर (र) की अंतिम यात्रा केवल शोक मनाने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह ईमान, राष्ट्रीय एकता, धार्मिक दूरदर्शिता, जनसामान्य की दृढ़ता, क्रांतिकारी निष्ठा, मुस्लिम उम्मत की एकता, प्रतिरोध मोर्चे की मजबूती, विलायत-ए-फ़क़ीह के प्रति नए संकल्प, दुश्मन की पहचान, सभ्यतागत जागरूकता, भविष्य की आशा और इस्लामी क्रांति की निरंतरता का स्पष्ट ऐलान था। यह महान घटना इस्लामी ईरान की शक्ति और जनता की क्षमता का व्यावहारिक प्रमाण है।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने कहा कि शहीद रहबर (रह.) के ख़ून का बदला लेना इस्लामी उम्मत का धार्मिक, कानूनी और नैतिक अधिकार है और यह अधिकार अत्याचार तथा आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध, इस्लामी शक्ति के सुदृढ़ीकरण और शहीदों के मार्ग पर दृढ़ रहने के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दुश्मन इस्लामी उम्मत के संकल्प को कमज़ोर करने में असफल रहा है और शहीदों का ख़ून इस्लामी जागरूकता और दृढ़ता को और अधिक मजबूत करेगा।
क़ुम के इमाम जुमा ने शहीद रहबर (र) की अंतिम यात्रा और नमाज़-ए-जनाज़ा में जनता, उलेमा, युवाओं और विभिन्न वर्गों की ऐतिहासिक भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि शहीद रहबर (र) की अंतिम यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि ईरानी राष्ट्र विलायत, क्रांति और इस्लामी मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा मैदान में मौजूद रहेगा और यही एकता दुश्मनों की सभी साज़िशों को विफल कर देगी।
उन्होंने क्षेत्रीय सरकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी ओर से क्षेत्रीय सरकारों के लिए यह संदेश है कि आप यहूदियों और ईसाइयों के प्रभुत्व तथा शैतानी शक्तियों से संबंधों से मुक्ति प्राप्त करें। अमेरिका और इज़राइल की खोखली शक्ति से भयभीत न हों और उनसे दूरी अपनाएँ। जो बातें आप हमसे अकेले में कहते हैं, उन्हें खुले तौर पर भी घोषित करें। राष्ट्र आपको स्वीकार करेंगे, लेकिन यदि आपने यह संबंध और निर्भरता जारी रखी तो याद रखें कि निश्चित रूप से इस्लामी क्रांति के सामने आपको असफलता का सामना करना पड़ेगा।





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